Zomato को दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने एक सफल यूनिकॉन फूड डिलीवरी कंपनी कैसे बनाया ।
Zomato की शुरुआत कैसे हुआ और इसे दीपेंद्र गोयल और पंकज चढ़ा द्वारा एक यूनिकॉन कंपनी बनाने तक के पूरे प्रक्रिया को समझें ।
जब Zomato की शुरुआत दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने की थी तब वे दोनों एक कंपनी में जॉब करते थे । और वहीं पर उन्हें zomato का आइडिया आया था उस कंपनी की ऑफिस में जितने भी एम्पलाई काम करते थे उन सबको हर दिन एक ही दिक्कत होती थी की आज क्या खाएं , मैन्यू का न मिलना, ऑर्डर कैसे करें वगैरा-वगैरा, वहां के कर्मचारियों का काफी समय इसमें बर्बाद हो जाता था और इस चीज को देखकर दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा को Zomato का खयाल आया । उन दोनों ने सोचा कि अगर हम इन सभी मेनू कार्ड्स को स्कैन करके ऑनलाइन डाल दें तो सारे एंप्लॉयी आराम से देख सकते हैं । किसी को कार्ड की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी । इसके लिए उन दोनों ने एक छोटी सी वेबसाइट बनाई Foodiebay.com, यह लगभग 2008 की बात है । वहां के कर्मचारियों को यह वेबसाइट बहुत अच्छी लगी क्योंकि अब रेस्टोरेंट का मेन्यू कार्ड एक वेबसाइट में लिस्ट थी ,
2008 में zomato की शुरुआत के बाद आज वह आज एक यूनिकॉन कंपनी कैसे बनी सब कुछ बारीकी से समझें ।
जब दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा ने Zomato की शुरुआत की थी तब Zomato की शुरुआत एक वेबसाइट के रूप में हुई थी तब Zomato का नाम zomato नहीं था बल्कि एक website "foodiebay.com" था । Foodiebay.com वेबसाईट को दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा ने खुद degin किया जिसमें कुछ खास खर्च नहीं लगा । बस डोमेन रजिस्ट्रेशन और बेसिक वेबसाइट बनाना ही शुरुआती खर्च था, जो लगभग हजार दो हजार रुपये में हो गया । शुरुआती में foodiebay.com को दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा ने केवल कंपनी के एंप्लॉई के लिए बनाया था । लेकिन उन्हें लगा कि यह एक बहुत बड़ा बिजनेस बन सकता है इसलिए हमें इसमें फॉक्स के साथ काम करना चाहीए उन दोनों की इसमें एक बहुत बड़ा बिजनेस बनने का फ्यूचर दिखा फिर दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा ने दिल्ली के अलग अलग रेस्टोरेंट में जाकर के रेस्टोरेंट के मालिक से बात करना शुरू किया कि हम आपके रेस्टोरेंट के मेन्यू कार्ड और रेस्टोरेंट को ऑनलाइन लिस्ट करना चाहते हैं । इससे आपको ऑनलाइन ऑर्डर आएंगे और अलग-अलग जगह से आपके रेस्टोरेंट में लोग आएंगे । दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा रेस्टोरेंट के मालिक से जाकर कहते थे की हमें सिर्फ आपका मेन्यू कार्ड दीजिए, हम फ्री में आपकी जानकारी ऑनलाइन डालेंगे और आपके रेस्टोरेंट को भी ओनलाइन लिस्ट करेंगे जिससे ग्राहक आपको ढूंढ पाएंगे और आपके रेस्टोरेंट में आएंगे । रेस्टोरेंट के मालिक को लगता था कि जब फ्री में वह हमारे रेस्टोरेंट और मेनू कार्ड को ऑनलाइन लिस्ट कर रहे हैं तो दिक्कत क्या है इससे हमें प्रॉफिट ही होगा इसलिए रेस्टोरेंट के मालिक आसानी से मान जाते थे फिर इसी तरह से धीरे-धीरे दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा ने अलग-अलग रेस्टोरेंट के मैन्यू कार्ड और रेस्टोरेंट को अपने वेबसाइट पर लिस्ट किया और ट्रैफिक लाया शुरुआती में लगभग दो-तीन साल बिना प्रॉफिट के काम कर रहे थे सिर्फ अपने वेबसाइट पर अलग-अलग रेस्टोरेंट को लिस्ट करने और मेन्यू कार्ड को लिस्ट करने पर ध्यान दे रहे थे और वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ा रहे थे मतलब 2,3 साल तक foodiebay.com का पूरा ध्यान यूजर बेस, ट्रैफिक और रेस्टोरेंट की संख्या बढ़ने पर था । लगभग 2008 में दीपेंद्र गोयल ने "foodiebay.com" नाम हटाकर zomato रख दिया क्योंकि यह ( Zomato ) नाम सिंपल था और आसन भी था लेकिन foodiebay.com दिखने में भी कॉम्प्लिकेटेड था और सुनने में भी कॉम्प्लिकेटेड था इससे उन्हें लगा ये नाम एक अच्छा ब्रांड नहीं बन सकता है इसलिए नाम बदल दिया । जब जोमैटो में एक अच्छा यूजर बेस बन गया तब रेस्टोरेंट का मालिक खुद zomato के पास अपने रेस्टोरेंट को लिस्ट करवाने के लिए आने लगे तब दीपेंद्र गोयल ने सोचा कि अब हमें थोड़ा प्रॉफिट पर ध्यान देना होगा इसीलिए उन्होंने रेस्टोरेंट के मालिक से उनके रेस्टोरेंट और मैन्यू कार्ड को Zomato पर लिस्ट करने के लिए चार्ज लेने लगे । क्योंकि zomato को बड़े लेवल पर एक्सपेंड करने के लिए उनके पास फंडिंग नहीं थे इसलिए उन्होंने चार्ज लेना शुरू किया । ताकि वे थोड़ी प्रॉफिट काम कर इन्हें बड़े लेवल पर expand कर सके Zomato को पहला funding info edge द्वारा लगभग 1 million dollar मिला । Info edge को लगा कि Zomato भले ही अभी रेवेन्यू जेनरेट नहीं कर रहा लेकिन फ्यूचर में बहुत रेवेन्यू जेनरेट करेगा क्योंकि zomato के पास यूजर बेस बहुत बड़ा था और एक ब्रांड भी बन चुका था अलग-अलग रेस्टोरेंट के मालिक अपने रेस्टोरेंट और मेनू कार्ड को लिस्ट करवाने के लिए zomato के पास आते थे । फिर इसी फंडिंग से zomato का रफ्तार शुरू हुआ । फिर दोबारा 2011 में लगभग 3.5 million डॉलर info edge ने zomato पर इन्वेस्ट किया और फिर तीसरी बार 2012 में info edge ने zomato को 10 million डॉलर का फंडिग दिया । 2010 और 11 के फंडिंग से zomato ने दिल्ली और आसपास के शहरों जैसे मुंबई पुणे बेंगलुरु इन सारे शहरों में zomato को expand किया और 2012 के फंडिंग से zomato ने इंटरनेशनल लेवल पर एक्सपेंड किया जैसे की UK, UAE, श्रीलंका आदि । इसी तरह zomato आगे बढ़ता गया और लगभग 2015 में zomato ने फूड डिलीवरी शुरू की । सबसे पहले दिल्ली NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में food डिलीवरी शुरू की । 2015 में लगभग zomato को info edge से 50 मिलियन डॉलर का फंडिंग मिला और इसी फंडिंग से उन्होंने डिलीवरी जैसे नए फीचर में expand किया । शुरुआती में रेस्टोरेंट खुद फूड को customer तक डिलीवर करते थे इस सिस्टम को Restaurant-led delivery model कहते हैं । फिर जोमैटो ने उन रेस्टोरेंट में खुद डिलीवरी शुरू की जिन रेस्टोरेंट में डिलीवरी कराना संभव नहीं था लेकिन रेस्टोरेंट और मैन्यू कार्ड Zomato में लिस्ट था इसे “Logistics-as-a-Service” सिस्टम कहते हैं । इसी फूड डिलीवरी से Zomato का रेवेन्यू ज्यादा जनरेट होने लगा । इसी तरह जोमैटो के न्यू स्ट्रेटजी और रणनीति से जोमैटो आगे बढ़ता चला गया और लगभग 2018 में zomato एक यूनिकॉर्न कंपनी बन गया । और आज जोमैटो का मार्केट वैल्यूएशन लगभग 22.86 बिलियन डॉलर है ।
