“Vendor Agreement क्या होता है और हर छोटे बिज़नेस को क्यों चाहिए?”

 “Vendor Agreement क्या होता है और हर छोटे बिज़नेस को क्यों चाहिए?”



Vendor Agreement क्या होता है।

Vendor Agreement एक कानूनी दस्तावेज़ (Legal Contract) है जो बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच होता है मतलब Buyer (जो सामान या सेवाएं खरीदता है) और Vendor (जो सामान या सेवाएं बेचता है) के बीच सौदे की शर्तों को स्पष्ट रूप से तय करता है। इस समझौते में यह यह निर्धारित होता है कि क्या आपूर्ति की जाएगी,कब और कैसे डिलीवरी होगी। और पेमेंट कब ओर कैसे कि जाएगी यदि किसी कारण से कोई विवाद या सामान डिले हो तो कैसे हल किया जाएगा यह Agreement न सिर्फ़ व्यापारिक लेन-देन को प्रोफेशनल और साधारण बनाता है, बल्कि दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा भी प्रदान करता है। छोटे और बड़े हर बिज़नेस के लिए यह समझौता विश्वास, जवाबदेही और स्पष्टता की नींव होता है।

Vendor Agreement के फायदे:

  • Quality Assurance

Vendor से जो माल या सेवाएं प्राप्त की जाती हैं, उनकी गुणवत्ता निर्धारित होती है। यह Agreement यह तय करता है कि वे किसी विशेष मानक या specifications को पूरा करेंगे। यदि प्रॉडक्ट या सर्विस निर्धारित समय पर नहीं मिलता है तो buyer को return, refund या replacement का अधिकार होता है।

  • Clear Terms & Conditions

Vendor agreement में Clear Terms & Conditions का होना दोनों के लिए बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि इसमें दोनों के द्वारा निर्धारित किए गए शर्तों लिखा होता है जैसे माल की कीमत, डिलीवरी का समय, पेमेंट की शर्तें, आदि।

  • Legal Proof

Vendor  दस्तावेज़ (Legal Document) होता है जो दोनों पक्षों (Buyer और Vendor) के बीच समझौते की शर्तों को स्पष्ट रूप से दर्ज करता है। जब यह दस्तावेज़ साइन किया जाता है, तो यह दोनों पक्षों के बीच एक legally binding contract बन जाता है। इसका मतलब है कि यह कानूनी रूप से मान्य होता है और इसे अदालत में पेश किया जा सकता है यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है। यह डॉक्यूमेंट buyer और vendor दोनों के बीच उनके अधिकारों की सुरक्षा करता है। यदि दोनों में से किसी को लगता है कि उनके साथ गलत हो रहा है तो वह इस Agreement के माध्यम से legal recourse ले सकता है। 

उदाहरण: अगर vendor ने किसी डिलीवरी में गलत product भेज दिया, तो buyer उसे return, refund, या replacement के लिए कोर्ट में ले जा सकता है, क्योंकि वह Agreement में दर्ज होता है जैसे buyer किसी Vendor से 5000 units का माल खरीदा है और डिलीवरी में 15 दिन की देरी हो गई तो इस स्थिति में buyer के पास Vendor Agreement होता है जो यह बताता है कि डिलीवरी 30 दिन में होनी चाहिए और यदि इसमें कोई देरी होती है, तो penalty लागू होगी यदि vendor इससे इनकार करता है, तो आप इस Agreement को अदालत में पेश कर सकते हैं और उसकी कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

  •  Payment Terms

इसमें यह पहले से निर्धारित रहता है कि payment कैसे की जाएगी (advance, milestone-based, या full payment) और कितनी राशि का भुगतान किया जाएगा।

अगर पेमेंट due या लेट पेमेंट करता है तो penalties भी लगाई जा सकती है जैसे कोई buyer यदि 100000 का सामना मांगता है और अगर टाइम पर डिलीवरी नहीं करता है तो 

इसके अलावा, payment due dates और late payment penalties भी दी जाती हैं कुछ रेट तय करके penalty ली जा सकती है।

  •  Delivery & Timeline

इसमें यह तय किया जाता है कि माल/सेवा कब और कैसे deliver किया जाएगा।

Delivery terms जैसे कि FOB (Free on Board) या CIF (Cost, Insurance, Freight) इस क्लॉज़ में लिखा जाता है, ताकि दोनों पक्षों को स्पष्टता हो कि माल को कब और किस बिंदु तक जिम्मेदारी के तहत भेजा जाएगा।


हर छोटे बिज़नेस को Vendor Agreement क्यों चाहिए?                

  •   Legal Protection (कानूनी सुरक्षा)

Buyer और Vendor दोनों को कानूनी सुरक्षा मिलती है। अगर कोई भी पक्ष अपने जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर रहा है, तो यह समझौता उसे कानूनी कार्रवाई का अधिकार देता है।

  •  Clear Communication

एक लिखित agreement होता है इन दोनों पक्षों के बीच clear communication को सुनिश्चित करता है। इससे किसी भी गलतफहमी या confusion की संभावना खत्म हो जाती है।

  • Quality Assurance

अगर Vendor ज्यादा फायदा कमाने के लिए माल या सेवाओं में कमी करता है तो buyer उसके खिलाफ एक legel नोटिस भेजा सकता है जिससे Vendor के विरोध कार्रवाई किया जा सकता है 

  •   Timely Deliveries

किसी भी बिज़नस को चालने के लिए ज़रूरी होता है कि उसके पास पहले से माल स्टॉक रहे प्रॉडक्ट नहीं रहेगा तो ये सामान बेचा नहीं पाएंगे जिससे भारी नुकसान हो सकता है इसलिए यह agrrement यह सुनिश्चित करता है कि vendor समय पर डिलीवरी करें अगर समय पर नहीं कर पाता है तो इसके लिए penalty लागू होता है जिससे प्रॉडक्ट या सर्विस टाइम पर मिलता हैं ।

  •  Fewer Disputes

हर चीज़ पहले से निर्धारित होते है जिससे किसी भी विवाद होने कि संभावना बहुत कम हो जाता है दोनों पक्ष पहले से जानते हैं कि उनका expectation क्या है और responsibility क्या है।

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