Debt-to-Equity Ratio ( D/E Ratio ) को डिटेल्स में समझें ।
Debt to Equity Ratio का सीधा मतलब होता है कि कोई भी कंपनी अपने बिजनेस को चलाने के लिए कितनी फंडिंग उधार (debt) से कर रही है और कितनी अपनी पूंजी (equity) से । Debt to equity ratio यह दिखाता है कि कंपनी ने 1 रुपये की अपनी पूंजी (equity) के मुकाबले कितना उधार (debt) लिया है ।
Debt to equity ratio को फार्मूले के आधार पर अच्छे से समझते हैं -
Debt to equity ratio= total debt/shareholder equity
1. Total Debt :-
किसी कंपनी ने अपने बिज़नेस को चलाने के लिए बैंकों या अन्य स्रोतों से जो भी उधार लिया है, वह उसका Total Debt होता है ।
इसमें दो चीजें आती हैं -
Short-Term Debt :-
जो 1 साल के अंदर चुकाना होता है (जैसे: Working capital loan)
Long-Term Debt:-
जो 1 साल से ज्यादा के लिए होता है (जैसे: Term loan, bonds)
उदाहरण -
अगर कंपनी ने 5 करोड़ का लोन बैंक से 5 साल के लिए लिया और 2 करोड़ का लोन 6 महीने के लिए, तो Total Debt = 5 + 2 = 7 करोड़
2. Shareholders' Equity :-
यह कंपनी के मालिकों (यानि शेयरहोल्डर्स) की कुल हिस्सेदारी है ।
इसमें शामिल होते हैं -
Share Capital (जितना पैसा शेयर बेचकर जुटाया )
Reserves & Surplus (कंपनी की बचत या लाभ)
उधारण-
अगर कंपनी के पास 15 करोड़ की संपत्ति (assets) है और 7 करोड़ का कर्ज़ (liability) है, तो:
\text{Equity} = 15 - 7 = \text{8 करोड़}
अगर किसी कंपनी का कुल उधार 10 करोड़ है और उसकी शेयरहोल्डर्स इक्विटी 5 करोड़ है, तो -
Debt to equity ratio=10/5
Debt to equity ratio= 2
इसका मतलब है कि कंपनी ने हर 1 रुपये की अपनी पूंजी के बदले 2 रुपये उधार लिया है।
Debt to Equity Ratio से निवेशक ( investors ) यह समझते हैं कि कोई भी कंपनी जिसमें वह पैसा लग रहा है वह कंपनी कितनी फाइनेंशियल रिस्क पर काम कर रही है ।