Reliance History

 Reliance History


धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस कंपनी की शुरुआत 1966 में की थी 1966 में उन्होंने सबसे पहले "रिलायंस कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन" नाम के एक कंपनी से इसकी शुरुआत की थी । उस वक्त धीरूभाई अंबानी का उम्र 34 साल था धीरूभाई अंबानी का पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी (Dhirajlal Hirachand Ambani) है । धीरूभाई अंबानी का जीवन काफी संघर्ष पूर्ण से भरा हुआ था धीरूभाई अंबानी एक लोअर मिडल क्लास शिक्षक के बेटे थे । धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 को गुजरात के चोरवाड़ में हुआ था जब धीरूभाई अंबानी 17 साल के थे तब वह यमन के ( aden ) शहर नौकरी करने के लिए चले गए उस वक्त यह शहर ब्रिटिश शासन के अधीन था लेकिन यहां व्यवसाय केंद्र बहुत बड़ा था इसलिए धीरूभाई अंबानी को लगा कि हमें व्यवसाय में रुचि है और हमारे घर की आर्थिक स्थिति भी खराब है उनको लगा कि अमन शहर जाना उनका एक सही डिसीजन है क्योंकि वहां उन्हें व्यवसाय की समझ भी मिली और रोजगार भी मिली । यमन में धीरूभाई अंबानी ने "A. Besse & Co." नाम की ब्रिटिश कंपनी में क्लर्क (Clerk) की नौकरी करी यह कंपनी तेल और अन्य सामानों की व्यापार करती थी कुछ साल बाद धीरूभाई अंबानी को वहां प्रमोशन मिला और वह वहां पेट्रोल पंप के ऑपरेटर बन गए । फिर उन्हें मैनेजर लेवल तक का प्रमोशन मिला इससे उन्होंने बिजनेस ऑपरेशन को समझा । यमन में अपने इस नौकरी के दौरान धीरूभाई अंबानी ने व्यवसाय के बारे में बहुत कुछ सीखा जैसे - व्यापार में आयात और निर्यात इंपॉर्टेंट और एक्सपोर्ट कैसे किया जाता है, बिजनेस में किस तरह से जोखिम लिया जाता है वह भी सही अवसर को देखकर, उन्होंने वहां तेल और पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज के महत्व को समझा, लीडरशिप ज्ञान, मार्केटिंग और फाइनेंस का ज्ञान मिला । यमन में नौकरी के दौरान धीरूभाई अंबानी ने व्यवसाय के बारे में बहुत कुछ सीखा और फिर 25 साल की उम्र में, 1957 में धीरूभाई अंबानी भारत लौट आए जब उनको लगा कि उन्हें व्यवसाय की काफी समझ हो चुकी है और उन्हें खुद का स्टार्टअप करना चाहिए । तब वे भारत लोट आए । ( 1957 - 1960 ) में मुंबई में धीरूभाई अंबानी ने मसालों और सूखे मेवों (Dry Fruits) का व्यापार किया, ( 1960- 1965 ) के दशक में धीरूभाई अंबानी ने पॉलिएस्टर यार्न और टेक्सटाइल की बिजनेस की । इन व्यवसाय के दौरान धीरूभाई अंबानी ने काफी कुछ सीखा और फिर 1966 में उन्होंने रिलायंस कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन की स्थापना की और यही कंपनी आगे चलकर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ( RIL ) बनी । आज रिलायंस इंडस्ट्रीज के अंदर बहुत सारी अलग अलग व्यवसाय आती है ।सो आज के इस आर्टिकल में हम उन सारे कंपनियों को एक-एक करके समझने वाले हैं कि इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने किन-किन कंपनियों को स्थापित किया और उन्हें उन कंपनियों को स्थापित करते वक्त किन-किन चैलेंज का सामना करना पड़ा ।


1 रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स 

रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स को धीरुभाई अंबानी ने लगभग 1980 के दशक में स्थापित किया रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स में शामान्यता पॉलीमर, फाइबर इंटरमीडिएट्स, एरोमैटिक्स जैसी प्रॉडक्ट बनाए जाते हैं ये प्रोडक्ट कच्चे तेल और प्राकृतिक गैसों से बनाए जाते हैं । रिलायंस पेट्रोकेमिकल के प्रोडक्ट से अलग-अलग चीजें बनाई जाती है जैसे - प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, डिटर्जेंट, पेंट, उर्वरक (फर्टिलाइज़र) । ऐसे और भी बहुत सारी चीज है जो रिलायंस पेट्रोकेमिकल के प्रोडक्ट से बनाए जाते हैं । धीरूभाई अंबानी को रिलायंस पेट्रोल केमिकल्स को बनाते वक्त कई चुनौतियां और चैलेंज का सामना करना पड़ा । जैसे उस वक्त भारत में पेट्रोकेमिकल का उतना अनुभव नहीं था उस वक्त यहां ऐसी बहुत कम कंपनियां थी इसलिए धीरूभाई अंबानी को नई तकनीक को अपनाना, नए इनोवेशन को लाना, उत्पादन प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाना जैसे कई चुनौतियां का सामना करना पड़ा , सरकार से कंपनी के लिए अलग-अलग परमिशन लेना बहुत कठिन था, लेकिन धीरूभाई अंबानी ने हार नहीं मानी और अपना कोशिश जारी रखा और की जान लगाकर मेहनत की फिर धीरे-धीरे रिलायंस पेट्रोकेमिकल भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख पेट्रोकेमिकल कंपनी में शामिल हो गई । 


2 रिलायंस कैपिटल लिमिटेड 

रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की स्थापना धीरूभाई अंबानी ने 1986 के दशक में किया था यह एक फाइनेंशियल सर्विस वाली कंपनी है जो बैंकिंग के अलावा अन्य वित्तीय सेवाओं में काम करती है जैसे की फाइनेंस, इंश्योरेंस, इन्वेस्टमेंट और एसेट मैनेजमेंट जैसी सेवाएं। उस वक्त 1986 के दशक में भारत में वित्तीय सेवा में सरकारी कंपनियों का दबदबा था क्योंकि प्राइवेट कंपनियों पर कोई भरोसा नहीं करता था लोगों को डर रहता था कि कहीं यह कंपनियां पैसा लेकर भाग न जाए इसलिए धीरूभाई अंबानी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज था लोगों का विश्वास जीतना लेकिन सारे प्रॉब्लम के बावजूद भी धीरूभाई अंबानी ने इस कंपनी को भारत की वित्तीय कंपनियों में एक बहुत बड़ी कंपनी बनाई बाद में यह कंपनी अनिल अंबानी के नेतृत्व में चला गया और इन्हें वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ा । और अंततः कंपनी बर्बाद हो गई इसके अलावा धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस पावर लिमिटेड - 1995, रिलायंस टेक्नोलॉजीज - 2001, रिलायंस लाइफ साइंसेज - 2001 ।

 ऐसी कई कंपनियां स्थापित की जिससे रिलायंस ग्रुप और भी ज्यादा मजबूत बन गया फिर धीरूभाई अंबानी का नाम भारत के सबसे अमीर आदमियों में आने लगा । और अंततः 6 दुर्भाग्य वस ( brain stroke ) बीमारी के कारण जुलाई 2002 को धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया । उनके निधन के बाद रिलायंस ग्रुप को धीरूभाई अंबानी के बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी ने संभाला लेकिन इन दोनों भाइयों का सोच और रणनीति एक न होने के कारण 2004 से 5 के बीच रिलायंस ग्रुप दोनों भाइयों के बीच बट गया । फिर अनिल अंबानी ने अपने बिजनेस में रफ्तार लाना शुरू कर दी लेकिन उनके गलत डिसीजन और गलत रणनीति के कारण धीरे-धीरे कंपनियां बर्बाद हो गई और अनिल अंबानी बर्बाद हो गया लेकिन मुकेश अंबानी ने सही रणनीति और डिसीजन के साथ फैसले लिए और कंपनी को आगे बढ़ाया और वे सफल रहे । 


धीरूभाई अंबानी के निधन हो जाने के बाद मुकेश अंबानी द्वारा स्थापित की गई कंपनियां 


1 रिलायंस रिटेल 

रिलायंस रिटेल की स्थापना 2006 के दशक में मुकेश अंबानी ने की थी । यह एक ( multi category ) रिटेल कंपनी है जो अलग-अलग प्रकार के प्रोडक्ट बेचती है ।

रिलायंस रिटेल के अपने कंपनी के प्रॉडक्ट के अलावा अंदर अलग-अलग कंपनी के अलग-अलग प्रोडक्ट बेची जाती है । जैसे की ग्रोसरी में किराना से रिलेटेड सारे सामान - फल सब्जियां, दूध और भी बहुत कुछ बेची जाती है, fashion aur lifestyle - कपड़े, जूते etc. इसके अलावा अलग-अलग कैटेगरी में अलग-अलग तरह की चीजें बेची जाती है । इस कंपनी को स्थापित करते वक्त मुकेश अंबानी को काफी सारे मुश्किलों और चैलेंज का सामना करना यह एक ऐसी कंपनी थी जो अलग-अलग शहर में सारे सामानों को एक साथ एक स्टोर में उपलब्ध कराया जाता था

इस कंपनी को स्थापित करते वक्त मुकेश अंबानी को काफी सारे मुश्किलों का सामना करना पड़ा जैसे जब किसी शहर में स्टोर को स्थापित किया जाता था तो आसपास के जितने भी कस्टमर थे उसी के स्टोर में आते थे क्योंकि वहां उन्हें एक साथ सारे सामान मिल जाते थे इससे उस शहर के लोकल लोगों के बिजनेस ठप होने लगी जिस कारण से वहां के लोगों ने विरोध करना शुरू किया जिसके कारण मुकेश अंबानी को अलग-अलग शहरों में काफी स्टोर को बंद करना पड़ा । इस बिजनेस में मुकेश अंबानी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज यही था । लेकिन मुकेश अंबानी ने फिर भी हार नहीं मानी और आज यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी खुदरा कम्पनियों में से एक है 


2 रिलायंस जियो 

 रिलायंस जिओ की नींव 15 फरवरी 2007 को रखी गई । 2010 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने infotel को खरीदा और इसका नाम jio infocomm ( RJIL ) रख दिया । Infotel Broadband Services Pvt. Ltd. (IBSPL) एक छोटी ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करने वाली कंपनी थी, जो भारत में इंटरनेट सेवाएँ देने का काम करती थी । उस वक्त सारी कंपनियां 2G, 3g नेटवर्क की ओर शिफ्ट हो रही थी । लेकिन मुकेश अंबानी ने 1.5 लाख करोड रुपए खर्च करके सीधे 4G नेटवर्क में कूद पड़े । और पूरे भारत देश में फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बिछाने पर फोकस किया । मुकेश अंबानी ने Infotel को इसलिए खरीदा क्योंकि यह कंपनी पूरे भारत में 4G स्पेक्ट्रम जीत चुकी थी मुकेश अंबानी के लिए दोबारा टेलीकॉम सेक्टर में जाने के लिए यह एक सही मौका था और उन्होंने इस मौका को हाथ से जाने नहीं दिया । फिर 5 सितंबर 2016 को जिओ ने कमर्शियल लॉन्च किया । कमर्शियल लॉन्च करने का मतलब है कि जियो ने जनता के लिए jio सेवा लॉन्च किया । 2016 में जब जियो ने जनता के लिए 6 महीने तक फ्री अनलिमिटेड 4G नेटवर्क सेवा लॉन्च की, 6 महीने फ्री सेवा देकर जियो ने बाकी दूसरे कंपनियों को पीछे छोड़ दिया क्योंकि जिओ नेटवर्क और 4g internet फ्री दे रहा था । जिओ ने एयरटेल वोडाफोन और आइडिया जैसी कंपनी को कड़ी टक्कर दे फ्री सेवा दे करके । इसी रफ्तार के साथ जिओ आगे बढ़ता गया जिओ ने भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्रीज में एक बड़ा बदलाव लाया और अंततः अब जियो 5G और AI टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है । 


इसी प्रकार छोटे बड़े उद्योगों से मुकेश अंबानी ने रिलायंस को आगे बढ़ाते चले गए । और आज रिलायंस दुनिया के सबसे बड़े कंपनियों में से एक बन चूका है । 

ऐसे और कई छोटे बड़े उद्योग है जिसको मुकेश अंबानी ने शुरू किया था लेकिन वह बंद हो गया जिसको मैंने इस आर्टिकल में कवर नहीं किया । 




 

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