Struggles aur challenges jo Steve's jobs ne apne business carrier me face Kiya
स्टीव जॉब्स ने अपने बिसनेस करियर में बहुत ही अधिक स्ट्रगल और चैलेंजेस को फेस किया
1 गरीबी का सामना करना
स्टीव जॉब्स एक मिडल क्लास परिवार से थे l उनके पिता का नाम पॉल जॉब्स ( paul jobs) जॉब्स था जो एक मैकेनिक थे और एक कंपनी के लिए काम करते थे l और स्टीव जॉब्स के माता का नाम क्लारा जॉब्स ( clara jobs ) थी जो एक अकाउंटेंट ( accountant ) थी l स्टीव जॉब्स एक मिडल क्लास परिवार से होने के कारण उन्हें काफी जायदा गरीबी का सामना करना पड़ा जैसे की वो जब कोलेज ( college) में पढ़ाई करते थे तब भोजन करने के लिए कोलेज से 7 मिल दूर हरे कृष्ण के मंदिर में जाते थे क्योंकि उनके पास खरीद कर भोजन करने के लिए उतने पैसे नहीं होते थे l स्टीव जॉब्स अपने फाइनेंशियल प्रोब्लम को कम करने के लिए coca-cola की बोतले बेचा करते थे । ताकि उनका फाइनेंशियल कंडीशन थोड़ा सही हो सके l अपनी इस मिडल क्लास की इस गरीबी के कारण उन्हें ये एहसास हुआ कि हमें अब इस गरीबी से दूर निकलना है और कुछ बड़ा करना है ताकि इस गरीबी का सामना जीवन भर न करना पड़े । उसके बाद उन्होंने बिजनेस का रास्ता चुना क्योंकि उनको लगा कि गरीबों को हम बिजनेस करके ही दूर कर सकते हैं तो स्टीव जॉब्स का उसके बिजनेस कैरियर में गरीबी उसका सबसे बड़ा चैलेंज था जिसे उन्हें फेस करना पड़ा ।
2 जिस कंपनी ( Apple ) को उसने बनाया था उसी से बाहर निकाल दीया जाना
Steve jobs ने जिसको एप्पल कंपनी का CEO बनाया उसी ने स्टीव जॉब्स को उसके कंपनी से बाहर निकाल दिया ।
1985 में( john sculley) ने स्टीव जॉब्स को एप्पल से बाहर निकाल दिया l
1983 में स्टीव जॉब्स ने ( john sculley) को एप्पल का CEO बनाया था l इससे पहले (John sculley) PepsiCo में थे वह वहां पेप्सी-कोला के पर्सिडेंट और CEO थे l
स्टीव जॉब्स बहुत ही जायदा जुनूनी जिदी और परफेक्शनिस्ट थे, उनकी लीडरशिप स्टाइल और मार्केटिंग startegy कई बार लोगों को बहुत ही जायदा जटिल और कठोर लगता था l
स्टीव जॉब्स अपने कर्मचारियों पर बहुत ही जायदा दबाव डालते थे और कई बार वे उन्हें अपमानित भी करते थे।
उनकी इस aggressive लीडरशिप के कारण कंपनी के कई टॉप मैनेजर और employees अक्सर उनसे नाराज रहते थे l
वे product और मार्केटिंग को सिर्फ एक बिसनेस की तरह नहीं बल्कि एक कला की तरह देखते थे उनकी मार्केटिंग और ब्रांडिंग रणनीतियां किसी दूसरे कम्पनी या फ़िर एप्पल के कम्पनी के सीईओ या फिर कम्पनी के अन्य board members से काफी जायदा भिन्न और अलग होता था l
जॉन स्कली और कम्पनी के अन्य बोर्ड मेंबर्स को लगता था कि जॉब्स की रणनीति और लीडरशॉप कंपनी को नुकसान पहुंचा सकती है। और इससे कंपनी को बहुत जायदा नुकसान हो सकता है l 1984 में लॉन्च किया गया macnitosh इनोवेटिव था लेकिन इसकी बिक्री उम्मीद से कम रही steve jobs इसके लिए आक्रामक मार्केटिंग strategy अपनाना चाहते थे लेकीन ( john sculley) और कम्पनी के बोर्ड members इसके कठोर मार्केटिंग strategy से सहमत नहीं थे l
इसके लिए स्टीव ने जॉन sculley को कम्पनी से बाहर निकलना चाहा लेकीन उल्टा जॉन sculley और कम्पनी के अन्य सभी boards members ने मिलकर स्टीव जॉब को ही कम्पनी से बाहर निकाल दिया l
इस घटना से स्टीव जॉब ने अपनी लीडरशिप के कठोर स्टाइल को सुधारा l एक सफल लीडर वही होता है जो सही समय में सबकी सहमति के साथ सही डिसीजन ले ना की अपनी जिद और जुनून पर अड़ जाए l सिर्फ नए इनोवेशन से कोई भी कंपनी बड़ी नहीं बनती बल्कि उस इनोवेशन में अन्य लोगों की राय क्या क्या है ये भी जानना जरूरी होता है इसके अलावा
उन्होंने अपने कठोर marketing और branding startegy को भी सुधारा l
Steve jobs ke इस फैलियर से हमें यही सीखने को मिलता है की एक बिजनेसमैन कितना भी इनोवेटिव क्यों न हो , कितना भी उसके पास इनोवेटिव आईडिया क्यों न जो लेकीन अगर उसके अन्दर लीडरशीप की क्वालिटी न हो तो वो वहां तक कभी नही पहुंच पाएगा जहां जाना उसका विज़न है जब तक कि वह अपने लीडरशिप क्वालिटी को develop न कर ले ।
एप्पल से बाहर निकाल दिए जाने के बाद स्टीव जॉब को अपनी जिंदगी का एक बहुत बड़ा झटका लगा लेकिन स्टीव जॉब्स ने अपने कर्मियों को एक्सेप्ट किया और उन्हे सुधारा l फिर 1990 में एप्पल कंपनी भारी नुकसान में जा रही थी कंपनी दिवालिया होने की कगार में थी तब 1995 में स्टीव जॉब्स को दोबारा एप्पल में बुलाया गया ।
3 NeXT ka failure
एप्पल से निकाल दिए जाने के बाद बाद स्टीव जॉब्स ने NeXT in. नाम की एक दूसरी कंप्यूटर कंपनी की शुरुवात की जिसका पहला कंप्यूटर का कीमत 6500$ था जो काफ़ी जायदा महंगा था इतना महंगा होने के कारण NeXT ने मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पाई
इसलिए ये फेल रहा बाद में जब स्टीव जॉब्स वापस एप्पल लोटे तब एप्पल ने NeXT को खरीद लिया l
4 Health issues
स्टीव जॉब्स को 2003 में "Pancreatic Neuroendocrine Tumor" (एक दुर्लभ प्रकार का अग्नाशय कैंसर) हुआ था।
डॉक्टर ने स्टीव जॉब्स को सर्जरी करवाने को कहा लेकिन स्टीव जॉब्स ने डॉक्टर के बात को अनसुना करके नेचुरल और आयुर्वेदिक तरीके से अपना इलाज करने लगे l फिर जब दिन प्रतिदिन स्टीव जॉब्स की हालत बिगड़ता गया तो 9 महीने के बाद स्टीव जॉब्स ने सर्जरी करवाई । लेकिन फिर 2 साल बाद 2006 में उनकी सेहद बिगड़ने लगी l 2009 में स्टीव जॉब्स को लीवर ट्रांसप्लांट करवाना पड़ा क्योंकि कैंसर लीवर तक फेल चुका था
उन्होंने इन बीमारियों के दौरान भी एप्पल कंपनी में jir जान से काम किया l अपनी इस बुरी हालत में भी स्टीव जॉब्स ने 2007 में आईफोन लॉन्च किया, iPad लॉन्च किया जिन प्रोडक्ट ने दुनिया में क्रांति लाई l
और आखिरकार 5 अक्टूबर 2011 को उनकी मौत हो गई स्टीव जॉब्स को एक गंभीर बीमारी थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तकलीफों के बावजूद अपना काम करना जारी रखा और iPhone, iPad जैसे प्रोडक्ट्स के जरिए दुनिया को बदल दिया। उनकी कहानी एक स्ट्रॉन्ग माइंडसेट और पैशन की मिसाल है।