Steve jobs in India

 Steve jobs in India 




परिचय:- स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया, अमेरिका में हुआ था । उनके पिता का नाम ( abdulfattah Jandali ) था जो सीरिया के रहने वाले थे जो पॉलिटिकल साइंस के प्रोफ़ेसर थे । और उनके माता का नाम (Joanne Carole Schieble ) थी जो एक शिक्षिका थी । जब स्टीव जॉब्स का जन्म हुआ तब उनके माता-पिता अविवाहित थे स्टीव जॉब्स के पिता मुस्लिम थे इसलिए स्टीव जॉब्स के माता के परिवार वालों ने उन दोनो के विवाह का विरोध किया जिससे उन दोनो का विवाह नहीं हो पाया। फ़िर स्टीव जॉब्स को उनके माता (Joanne Carole Schieble ) ने स्टीव जॉब्स को पॉल जॉब्स और क्लारा जॉब्स को गोद दे दिया उस वक्त पॉल जॉब्स एक गैरेज में काम करते थे और क्लारा जॉब्स एक accountant थी ।


स्टीव जॉब्स भारत क्यों आए, कैसे आए, कब आए और भारत आ करके उन्होंने यहां के लोगों, संस्कृति ऋषि मुनियों और साधुओं से क्या-क्या सीखे ! ये सबकुछ आपको आज के इस आर्टिकल में जानने को मिलेगा ।


स्टीव जॉब्स 1974 में भारत आए थे तब वे करीब 19 साल के थे । स्टीव जॉब्स ने 1972 में ( reed college ) में दाखिला लिया था । लेकिन 6 महीने के बाद ही उन्होंने अपना कॉलेज ड्रॉप कर दिया । उनको लगा कि वे जो कॉलेज में पढ़ रहे हैं वो सब उनके जीवन में कहीं उपयोग नहीं होगा और इससे उनके माता-पिता के जमा पूंजी भी वहां खत्म हो रहे थे । कॉलेज छोड़ने के 1.5 साल बाद 1974 में उन्होंने अटारी ( atari ) गेमिंग कंपनी में जॉब  की । जहां वे वीडियो गेम डिजाइन में मदद कर रहे थे । अटारी में काम करते वक्त स्टीव जॉब की मुलाकात डेनियल कोर्ट से हुई जो उनके एक अच्छे दोस्त बने । उस वक्त स्टीव जॉब्स कई आध्यात्मिक किताबें पढ़ रहे थे जैसे की ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी । 

जब वे कॉलेज में थे तब उन्होंने वहां के सीनियर "रॉबर्ट फ्राइडलैंड" से नीम करोली बाबा के बारे में सुना था नीम करौली बाबा भारत के एक प्रसिद्ध हिंदू संत और आध्यात्मिक गुरु थे । उसी वक्त से उन्हें नीम करोली बाबा से मिलने का मन था और भारत यात्रा करने का शौक था । फिर अटारी कंपनी ने उन्हें यूरोप या भारत जाने के लिए ऑफर किया ताकि वह खुद को खोज सके और कुछ समय के लिए दूर जा सके और अपने जीवन के बारे में जान सके ।

फिर 1974 में स्टीव जॉब्स और उनके दोस्त डेनियल कोट्टके भारत आए  । यह यात्रा स्टीव जॉब्स के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिससे उन्होंने काफी कुछ सीखा इस यात्रा ने उनके जीवन के विचारों को, दर्शन को और व्यवसाय के दृष्टिकोण को बहुत ही गहराई से प्रभावित किया । स्टीव जॉब्स ने भारत में अपना सबसे पहला कदम दिल्ली में रखा था वहां उन्होंने भारतीय संस्कृति को समझा कि भारत के लोग कैसे होते हैं उनके रहन-सहन कैसे होते हैं उनके जीने का तरीका कैसा होता है, उसके बाद जब वह उत्तराखंड के कैंची धाम ( नैनीताल ), नीम करोली बाबा के आश्रम में पहुंचे तब पता चला कि नीम करोली बाबा की मृत्यु हो चुकी है यह बात जानकर उन्हें काफी बुरा लगा क्योंकि उन्हें नीम करोली बाबा से मिलने का बहुत मन था फिर भी उन्होंने इस आश्रम में कुछ समय बिताए, उन्होंने वहां के संत साधुओं से बातचीत की और काफी कुछ सीखें, यहां उन्हें पहली बार जैन और भारतीय ध्यान पद्धति की झलक मिली । उसके बाद वह ऋषिकेश और बनारस जैसे स्थानों पर गए और वहां भारतीय साधुओं के साथ समय बिताए फिर उनसे भी काफी कुछ सीखे । स्टीव जॉब्स ने भारत की इस यात्रा से सादगी ( simplacity ) और ( minamilism ) के बारे में सीखा । और इसी सिंपलीसिटी को उन्होंने एप्पल कंपनी के प्रोडक्ट के डिजाइन में अप्लाई किया । उन्होंने भारत के लोगों को देखा और समझा कि यहां लोग कितने सिंपल होते हैं और कितने सामान्य और शांतिपूर्ण तरीके से अपना जीवन यापन करते हैं उन्होंने यहां शांति का अनुभव किया । और सिंपलीसिटी को समझा । 


स्टीव जॉब्स जब भारत आए थे तब वे एप्पल बनाने की नहीं बल्कि खुद को समझने की कोशिश कर रहे थे । भारत आने के बाद स्टीव जॉब्स आध्यात्मिक रूप से बदल चुके थे भारत से लोटने के बाद उन्होंने बौद्ध धर्म के जैन विचारों को अपनाया और फिर 1976 में एप्पल की स्थापना की ।

स्टीव जॉब्स के भारत के इस यात्रा ने उनके सोच और जीवन को पूरी तरह से बदल दिया । सादगी ,ध्यान , फोकस और इन्नोवेशन को उन्होंने इसी यात्रा से सीखा उन्होंने मेडिटेशन को समझा , अपने जिवन के मकसद को समझ। 

जब स्टीव जॉब्स भारत की यात्रा कर रहे थे तब वे मंदिरों और आश्रम में रुकते थे क्योंकि उनके पास होटल में रुकने के लिए उतने पैसा नहीं थे

इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि अगर आप भी किसी खास जगह की यात्रा करना चाहते हैं और आपके पास पैसे नहीं है तो आप कम पैसों में भी यात्रा कर सकते हैं और अपने जीवन के मकसद को समझ सकते हैं । यात्रा करने से हमें अपने जीवन में एक सही दिशा मिलती है जिससे हम अपने जीवन को सही डायरेक्शन की ओर ले जाते हैं । यात्रा करने से हमें यह क्लेरिटी होती है कि हमें जीवन में क्या करना है , यात्रा करने से हमारा सोच, हमारा दिमाग, हमारा बॉडी,सब कुछ अलग तरीके से काम करता है । क्योंकि जब हमारा दिमाग और बॉडी अलग-अलग चीजों को देखता है अलग-अलग चीजों को एक्सपीरियंस करता है । अलग अलग कल्चर के लोगों से मिलता तो जिवन में काफ़ी क्लेरिटी मिलता है जिससे हमें अपने जीवन का मकसद पता चलता है । 

अगर आपको अपने जीवन का मकसद नहीं पता है की आपको लाइफ में क्या करना है तो आप कुछ दिनों के लिए यात्रा पर निकल जाइए अलग-अलग जगह को एक्सप्लोर कीजिए, अलग-अलग लोगों से मिलिए उसके बाद आपका नजरिया, आपका सोच सब कुछ बदल जाएगा आपको जीवन में एक क्लेरिटी मिल जाएगी की आपको जीवन में क्या करना है

स्टीव जॉब्स ने एप्पल को दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड में से एक इसलिए बना पाया क्योंकि भारत की यात्रा के दौरान उन्होंने अपने जीवन को समझा, अपने जीवन के मकसद को समझा, अपने माइंड को समझा, अपने बॉडी को समझा और उन्हें काफी चीजों की क्लेरिटी मिली ।


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