कैसे एक विजनरी व्यक्ति ने DMart को भारत का सबसे सस्ता और सबसे ज्यादा प्रॉफिट देने वाला स्टोर बनाया ?
DMart का बिजनेस मॉडल Discount Retail Model पर आधारित है, यानी हर सामान सबसे कम कीमत पर बेचना ,ग्राहकों को बार-बार खरीदारी के लिए लुभाना ।DMart की शुरुआत 2002 में हुई थी, डी मार्ट की स्थापना राधाकिशन दमानी जी ने किया था इन्होंने पहला स्टोर मुंबई में खोला । राधाकिशन दमानी जी स्टॉक मार्केट के सक्सेसफुल इन्वेस्टर रह चुके हैं । राधाकिशन दमानी ने देखा कि भारत मै रिटेल इंडस्ट्री बहुत तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है उसके बाद वे अमेरिका चले गए वहां जाकर उन्होंने Walmart और अमेरिका के डिस्काउंट रिटेल के बिजनेस मॉडल को गहराई से रिसर्च किया ओर समझा फिर भारत आकर Dmart कि शुरुआत की । उनका विजन था कि ग्राहकों को हर रोज सबसे सस्ते दाम पर रोजमर्रा का सामान मिले जो कम दाम मै वैल्यूएबल हो ।
राधाकिशन दमानी का जन्म एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था, जो बाद में मुंबई शिफ्ट हो गया। उनके पिता स्टॉक मार्केट में छोटे इन्वेस्टर थे, जिससे दमानी को भी फाइनेंस और इन्वेस्टिंग में रुचि आई । उन्होंने मुंबई के एक लोकल कॉलेज में B.Com की पढ़ाई शुरू की लेकिन एक साल बाद कॉलेज ड्रॉपआउट कर दिया और अपने पारिवारिक बिजनेस में लग गए इस आर्टिकल में हम जानेंगे - DMart का बिजनेस मॉडल – कैसे यह सबसे ज्यादा मुनाफा कमाता है ।
स्वयं की प्रॉपर्टी पर स्टोर्स बनाना – किराए पर नहीं लेन
DMart का 80% से ज्यादा अपना ख़ुद का स्टोर है DMart जहां भी स्टोर खोलता है पहले वहां जाकर बढ़िया से रिसर्च करता है फ़िर अपना ख़ुद का ज़मीन खरीद लेता है और अपना जमीन में अपना स्टोर खोलता है जिससे इनको कोई भी किराया नहीं देना पड़ता है वहीं दूसरे बड़े रिटेल किराए पर ज़मीन लेता है जिससे उनको किराया देने मै बहुत ज्यादा पैसे लग जाते हैं । किराए देने से उनके सामना महंगे हो जाते हैं । Dmart को अच्छे से पता था कि अगर सस्ते दाम मै बेचना है तो इन सभी खर्चे को कम करना होगा इससे हर महीने किराए का खर्चा बचता है, और लॉन्ग-टर्म में प्रॉफिट बढ़ता है।
डायरेक्ट मैन्युफैक्चरर से सामान खरीदना
DMart का मुख्य उद्देश्य मिडिल क्लास और लोवर मिडिल क्लास के लोगों को टार्गेट करने का था अच्छे ऑफर होने के करना प्रॉडक्ट बहुत तेजी से सेल होता है स्टोर का सामन कुछ ही दिनों में खाली हो जाता है । DMart ने समान को और ज्यादा सस्ता करने के लिए बीच में कोई डिस्टीब्यूटर नहीं रखा ओर न ही wholseller इन दोनों को रखने से बहुत ज्यादा कमीशन लग जाता है इसलिए उन्होंने तय किया कि सारा सामान सीधा मैन्युफैक्चरर से लेगे जिससे इसमें लगने वाला कमीशन बचा सके और सामना सस्ते दाम मै मिले । ये डायरेक्ट मैन्युफैक्चरर के पास जाकर बात करते हैं उनसे डायरेक्ट डील कर लेते थे । इसका सामान कुछ ही दिनों मै सेल होने से इनके पास कैपिटल आ जाता था जिससे वे मैन्युफैक्चरर को तुरंत पेमेंट कर देता था जहां दूसरे बड़े रिटेल जैसे बिग बाज़ार को पेमेंट करने मै 60 से 90 दिन तक लग जाता था वहीं Dmart तुरंत पेमेंट कर देते थे जिससे manufacture के साथ बढ़िया connection हो जाता था और इसे manufacture और ज्यादा डिस्काउंट देता था । Dmart एक ही बार मै जायदा सामना ख़रीद लेता है जिससे मैन्युफैक्चरर मार्केट से कम price मै देने को तैयार हो जाता है जिससे इसके प्रॉडक्ट के दाम कम हो जाता है
लो-कॉस्ट ऑपरेशन – कोई फालतू खर्च नहीं
DMart की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि ये लो-कॉस्ट ऑपरेशन कि स्ट्रेटजी पर काम करता है यह कंपनी हर छोटे से छोटे खर्च को कंट्रोल करती है और जरूरी चीजों पर ही निवेश करती है अपने स्टोर को कस्टंबर के हिसाब से डिज़ाइन करते है ज्यादा महंगे इंटीरियर पर ध्यान नहीं देता है AC शोरूम पर ज्यादा पैसे बर्बाद नहीं करता है जहां दूसरी बड़ी रिटेल चेन महंगे इंटीरियर और डिजाइन पर पैसा खर्च करती हैं वहीं DMart सिर्फ बेसिक शेल्विंग (रैक), अच्छी देखने पर ध्यान देता है जिससे रखरखाव (maintenance) का खर्च कम हो जाता है, मार्केटिंग में ज्यादा खर्च नहीं करता टीवी ऐड महंगी मार्केटिंग पर पैसा नहीं लगाता यह मौखिक प्रचार (word of mouth) और ग्राहक की संतुष्टि पर फोकस करता है जिससे ग्राहकों को अच्छे और सस्ते सामना मिलते है जिससे कस्टंबर ख़ुद ही दूसरे को बताकर मार्केटिंग कर देते है DMart में सेल्समैन की संख्या बहुत कम होती है ग्राहक खुद ही प्रोडक्ट उठाते हैं और बिलिंग करवाते हैं जिससे ज्यादा स्टाफ नहीं लगते है कम स्टाप होने से सैलरी का पैसे बचता है यह ज्यादातर स्टोर बड़े बड़े शहरों की बजाय टियर-2 और टियर-3 शहरों पर बनाता है जहां प्रॉपर्टी की कीमत बहुत कम होती है जिससे लोगों को ओर ज्यादा सस्ता सामान मिला पता है । डी मार्ट को कस्टमर की जरूरत पता था की लोगो को सस्ता सामना ज्यादा पसंद आता था जिससे इनकी बिक्री ज्यादा होता था इसलिए ये कम खर्चे में ज्यादा डिस्काउंट दे पाते थे DMart ने शुरूवात से ही लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट कि रणनीति अपनाई, अपनी ख़ुद कि बिल्डिंग बनाए, किराया से बचा, फालतू का कोई भी खर्चे नहीं किया जिससे इनकी संपति (assets) लागतार बढ़ते गया शुरूवात में इन्होने एक स्टोर खोला फ़िर उसका प्रॉफिट से दूसरा खोला इसी तरह से करते गया और आज भारत मै DMart का 377 से ज्यादा स्टोर है ।