ये 5 बिजनेस secret जो स्टीव जॉब्स ने अपनी कंपनी बनाने के लिए use किया ।
स्टीव जॉब्स का 5 बिजनेस सीक्रेट जिसने एप्पल को दुनिया का एक सबसे बड़ा ब्रांड में शामिल कर दिया ।
1 कस्टमर की जरूरत समझने से पहले प्रोडक्ट बनाएं :
स्टीव जॉब्स ने मार्केट रिसर्च की बजाय अपनी खुद की इंस्टींक्स पर भरोसा किया। वे कहते थे कि ग्राहक को खुद नहीं पता होता कि उसे क्या चाहिए, जब तक की आप उन्हें वह चीज़ दिखाएं ना । स्टीव जॉब्स का मानना था की मार्केट में जाकर अगर हम ये रिसर्च करें कि कस्टमर को एक्चुअल में क्या चाहिए इससे अच्छा है की पहले हम प्रोडक्ट बनाएं उसके बाद उसे कस्टमर के पास ले जाकर उस प्रॉडक्ट की टेस्ट करें की उस प्रोडक्ट से customer की एक्चुअल प्रॉब्लम सॉल्व हो रही या नहीं । स्टीव जॉब्स का यह मानना था कि हमें कस्टमर की नीड को समझने की वजाय सबसे पहले प्रोडक्ट को बनाना चाहिए उसके बाद उस प्रॉडक्ट को कस्टमर के पास ले जाकर उसकी टेस्ट करनी चाहिए । फिर कस्टमर के फीडबैक से ही पता चलेगा की ये प्रोडक्ट मार्केट में फ्लॉप करेगा या फिर बूम करेगा ।
2 सिंपल डिज़ाइन और यूजर फ्रेंडली प्रॉडक्ट :
स्टीव जॉब्स ने Apple के हर प्रोडक्ट का डिज़ाइन सिंपल और यूजर-फ्रेंडली रखा । स्टीव जॉब्स मानते थे कि जटिलता को दूर करके एक बेहतरीन प्रोडक्ट बनाया जा सकता है , एक सिंपल डिजाइन प्रोडक्ट कस्टमर को ज्यादा अट्रैक्ट करता है सिंपल डिजाइन से मतलब यह नहीं की प्रोडक्ट में बिल्कुल भी कोई डिज़ाइन ही ना हो । प्रोडक्ट का डिजाइन ऐसा होना चाहिए की वो सिंपल ही हो लेकिन उसमें कुछ एक ऐसा छोटा सा डिजाइन हो जिससे customer तुरंत उस प्रोडक्ट की ओर अट्रैक्ट हो जाए और उस प्रॉडक्ट के बारे में उसके दिमाग में अलग अलग thought आने लग जाए जैसे एप्पल प्रोडक्ट का डिजाइन सिंपल है उसमें कुछ भी कॉम्प्लिकेटेड नहीं है बस उसमें एक एप्पल का सिंपल सा ( logo ) है और वह ( logo )एप्पल की कंपनी के नाम से मैच करता है । एक सिंपल डिजाइन का प्रोडक्ट जब कोई कस्टमर देखता है तो उसके दिमाग में वह डिजाइन हमेशा के लिए बैठ जाता है क्योंकि वह सिंपल होता । लेकिन उसमें कुछ ऐसा होता है जिससे वो उसके दिमाग से कभी नहीं निकलता है जिससे प्रोडक्ट का बेस्ट मार्केटिंग होता है ।क्योंकि वह प्रोडक्ट एक ही बार में customer के दिमाग में हमेशा के लिए बैठ जाता है इसलिए उस प्रॉडक्ट का बार बार मार्केटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ता है ।
इसलिए प्रोडक्ट का डिजाइन जितना सिंपल होगा उतना ही कस्टमर उसके और अट्रैक्ट होगा बस उसमें कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे वह प्रोडक्ट कस्टमर के दिमाग में हमेशा के लिए बैठ जाए ।
3 सैकड़ो की बचाई कुछ गिने चुने प्रोडक्ट पर फोकस्ड करें।
स्टीव जॉब्स जब 1997 में एप्पल लोटे तो उन्होने 70% प्रॉडक्ट को बंद कर दिया और कुछ गिने-चुने प्रॉडक्ट पर फोकस किया जैसे - mac, ipod, iphone, और ipad । सैकड़ो प्रोडक्ट पर फोकस करने की बजाय कुछ ऐसे प्रोडक्ट पर फोकस करना चाहिए जिस प्रोडक्ट को देखने के बाद ऐसा लगे कि जैसे की यह प्रोडक्ट दुनिया बदल सकता है । कुछ कंपनियां ऐसी होती है जो अपनी कंपनी में बहुत सारे प्रोडक्ट को लॉन्च कर देते हैं और उनका ध्यान सारे प्रोडक्ट के ऊपर होते हैं जिससे प्रोडक्ट का क्वालिटी बैटर नहीं हो पता है लेकिन जब वह कुछ खास प्रोडक्ट पर काम करते हैं तो उस प्रोडक्ट को एक बेटर प्रोडक्ट के रूप में कन्वर्ट कर देते हैं। क्योंकि उनके पास सिर्फ कुछ गिने-चुने प्रोडक्ट ही होते हैं ना की सैकड़ो प्रोडक्ट । स्टीव जॉब्स की इस बात से हम सीखते हैं कि सैकड़ो प्रोडक्ट पर फोकस करने की बजाए हमें किसी खास या फिर कुछ गिने-चुने प्रोडक्ट पर ही फोकस करनी चाहिए और उस प्रोडक्ट को एक बेटर प्रोडक्ट के रूप में कन्वर्ट करके एक बेस्ट प्रॉडक्ट बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि वह प्रोडक्ट पूरी दुनिया में एक revolution लाए।
4 अपने प्रोडक्ट का प्राइस सस्ते न रखकर महंगा रखें :
स्टीव जॉब्स ने कभी भी सस्ते प्रोडक्ट नहीं बनाए बल्कि सिर्फ बेस्ट क्वालिटी पर ध्यान दिया । स्टीव जॉब्स का ऐसा मानना था कि एक बड़ा ब्रांड बनाने के लिए हमें अपने प्रोडक्ट के प्राइस को भी high रखना होगा । और उस प्रोडक्ट के क्वालिटी में बिल्कुल भी comparmise नहीं करनी होगि बल्कि उस प्रोडक्ट का क्वालिटी को बेटर से बेटर बनाने का कोशिश करना होगा । क्योंकि जब प्रोडक्ट का क्वालिटी बेटर होगा तभी हम प्रोडक्ट के price को high रख सकते हैं इसीलिए आज एप्पल कंपनी दुनिया का एक महंगा और क्वालिटी ब्रांड बन गया । एप्पल का क्वालिटी भी बेस्ट है और प्राइस भी high है। एक बार आप दुनिया के उन ब्रांड पर नजर doraiyea जो एक बड़े ब्रांड है । उन सारे बड़े ब्रांड में आपको एक चीज कॉमन मिलेगा कि उनका प्रोडक्ट का प्राइस हमेशा हाई होता है और क्वालिटी भी बेस्ट होता है । अगर आप अपने प्रोडक्ट का प्राइस को लो रखोगे तो लोगों के नजर में वह एक cheap प्रोडक्ट होगा, लोगों की नजर में वह एक छोटा ब्रांड होगा । लो प्राइस के कारण आपका ब्रांड दुनिया के बड़े और क्वॉलिटी ब्रांड में शामिल कभी नहीं होगा । क्योंकि लो प्राइस होने के कारण लोग उसकी वैल्यू नहीं करेंगे भले ही आपके प्रोडक्ट का क्वालिटी बेस्ट ही क्यों ना हो
5. एंड-टू-एंड कंट्रोल (वर्टिकल इंटीग्रेशन) :
एप्पल कंपनी अपने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को खुद ही बनाता जिससे कंपनी को अपने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को किस तरह से डिजाइन करना है इस चीज का कंट्रोल कंपनी के पास खुद रहता है । यह स्ट्रेटजी एप्पल को बाकी कंपनियों से अलग बनाता है । स्टीव जॉब्स का मानना था कि जब हम किसी दूसरे कंपनी के हार्डवेयर या फिर सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहते हैं तो प्रोडक्ट का क्वालिटी खराब हो सकता है । जिससे हमारे ब्रांड का नाम खराब होगा ।
वर्टिकल इंटीग्रेशन का मतलब है कि एप्पल कंपनी अपने प्रोडक्ट को बनाने से लेकर के उसे डिलीवर करने तक का प्रक्रिया को खुद कंप्लीट करता है । उन्हें अपने प्रोडक्ट को डिलीवर करने के लिए किसी थर्ड पार्टी रिटेलर से कॉन्टैक्ट नहीं करना पड़ता है ।
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