Oyo ( Ritesh Agarwal ) की बायोग्राफी ।
परिचय
रितेश अग्रवाल OYO ( oravel stays pvt. Ltd. ) के founder और CEO हैं । OYO एक hospitality और travel tech company' है oyo का मैन फॉक्स budget hotels और affordable stay को organize करना है, standardize करना है और online bookable बनाना है । आज oyo का वैल्यूएशन लगभग 4.5 billion dollar से लेकर 5 billion dollar तक है ।इसके अलावा रितेश अग्रवाल एक इन्वेस्टर ( investor ) भी हैं जो अभी तक लगभग 27 कंपनी में इन्वेस्ट कर चुके हैं । रितेश अग्रवाल का शुरुआती जीवन देखे तो रितेश अग्रवाल का जन्म उड़ीसा के बिसम कटक गांव में हुआ था रितेश अग्रवाल ने अपने स्कूल की पढ़ाई Sacred Heart School, रायगढ़ ( उड़ीसा ) में पूरी की थी । रितेश अग्रवाल ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई Indian School of Business and Finance (ISBF) से की जो new delhi में है । लेकिन रितेश अग्रवाल ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कि उन्होंने 2011 में ( ISBF ) में एडमिशन ली और 2012 में उन्होंने अपने कॉलेज को ड्रॉप कर दिया और अपने बिजनेस जर्नी की और आगे बढ़े ।
रितेश अग्रवाल की बिजनेस जर्नी ( oyo की शुरू से लेकर अंत तक का सफ़र )
रितेश अग्रवाल बचपन से ही एक जिज्ञासु बच्चे थे उन्में नई नई चीजें सीखने की जिज्ञासा थी रितेश अग्रवाल पढ़ाई में उतने अच्छे नहीं थे लेकिन वह टेक्नोलॉजी, कोडिंग, बिजनेस इन चीजों में काफी इंटरेस्टेड थे । जब रितेश अग्रवाल स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे तब वह 13 साल के उम्र के थे उस वक्त रितेश अग्रवाल ने सिम कार्ड का बिजनेस शुरू किया था । वे कम उम्र में ही पैसे कमाने के बारे में सोचने लगे । और इसके लिए उन्होंने सिम कार्ड का बिजनेस शुरू किया । रितेश लोगों को सिम कार्ड के साथ रिचार्ज प्लान और कॉल रेट्स के फायदे भी समझाते थे । इससे रितेश agarwal में मार्केटिंग स्किल्स और कम्युनिकेशन skill डेवलप हुआ । जिसका उन्हें फ्यूचर में बहुत फायदा हुआ । जब रितेश अग्रवाल 17 साल की उम्र के थे तब रितेश को घूमने का बहुत शौक था वह पूरा भारत घूमना चाहते थे । लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह पूरा भारत ट्रैवल कर सके लेकिन फिर भी रितेश ने हार नहीं मानी । उन्होंने सोचा कि हम कम बजट में पूरा भारत ट्रैवल कर सकते हैं । फिर जब रितेश अग्रवाल ट्रैवल करने लगे तब जब वह छोटे-छोटे होटल रूम में रुकते थे तब उन्हें वहां पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था जैसे छोटे-छोटे होटल के रूम्स साफ सुथरा न होना, हर जगह गंदगी फैला हुआ होना, बाथरूम ठीक न होना, बाथरूम मे हद से जायदा गंदगी होना,कभी कवार रूम्स के लिए पैसे ज्यादा देने पड़ते थे लेकिन रूम का क्वालिटी पूरा बेकार होता था । और इन्हीं चीजों और प्रोब्लम को देखकर रितेश के मन में एक आईडिया है कि क्यों ना एक ऐसा ब्रांड बनाया जाए जो ब्रांड मेरा हो और भारत में जीतने भी छोटे छोटे होटल्स है जो नहीं चल रही है, जिन होटल में बहुत सारी परेशानियां जैसे गंदगी, रूम सही ना होना,बेड सही ना होना,रूम के अंदर फैसिलिटी ना होना उन होटल को एक ब्रांड के अंदर ला करके सही से ऑर्गेनाइज करना और लोगों के लिए एक ब्रांड के under एक अच्छा रूम प्रोवाइड करना । और यहीं से शुरुआत होती है oyo की 19 साल की उम्र में ही रीतेश अग्रवाल ने oyo की शुरुआत की थी । शुरुआत में रीतेश अग्रवाल ने इसे Oravel Stays नाम से लॉन्च किया था, जो Airbnb जैसा कॉन्सेप्ट था । लेकिन फिर बाद में उन्होंने इसे रीब्रांड करके OYO (On Your Own) कर दिया और बजट होटल चेन पर फोकस किया ।
OYO को रितेश अग्रवाल ने कैसे पिक तक पहुंचाया "डिटेल में समझे" ।
जब रितेश अग्रवाल ने Oyo की शुरुआत की थी तब उनके पास पैसे नहीं थे क्योंकि तब वह पढ़ाई कर रहे थे रितेश अग्रवाल ने खुद से वेबसाईट बनाई और अलग-अलग ऐसे छोटे-छोटे होटलों से बात करने लगे जो बिल्कुल नहीं चलते थे या फिर न के बराबर चले थे । और उन होटलों को अपने वेबसाइट पर लिस्ट करने लगे । होटल में थोड़ी बहुत इंप्लीमेंट करने लगे जब रितेश अग्रवाल छोटे-मोटे होटल के मालिक से मिलते थे तब वह उनसे कहते थे कि हम एक प्रॉब्लम सॉल्विंग काम कर रहे हैं जिसमें 90% आपका फायदा होगा और 10% मेरा वह होटल के मालिक से कहते थे कि हम आपके होटल को अपने वेबसाइट पर लिस्ट करना चाहते हैं इससे आपके होटल ऑनलाइन बुक होंगे, होटल के मालिक से रितेश अग्रवाल कहते थे कि मैं ऑनलाइन बुकिंग आपके होटल का फ्री में करूंगा कोई चार्ज नहीं लूंगा कस्टमर जितने भी आएंगे मेरे वेबसाइट के थ्रू उनमें से 90% प्रॉफिट आपका और 10% मेरा । रितेश अग्रवाल होटल के मालिक से कहते थे कि इसमें ना ही आपका कोई जोखिम है और ना ही मेरा तो करने में क्या जाता है प्रॉफिट होगा तो भी अच्छी बात और अगर नहीं होगा तो भी कोई नुक़सान नहीं । ट्रस्ट बनाने के लिए रितेश अग्रवाल ने अलग-अलग होटल खुद जाते थे क्योंकि रीतेश के पास ना ही टीम थी और ना ही पैसा । वह वहां खुद साफ सफाई करते थे और वहां के सारे चीजों को खुद से ऑर्गेनाइज करते थे और अच्छे फोटो क्लिक करके अपने वेबसाइट पर लिस्ट करते थे । यहां तक की रितेश अग्रवाल को कुछ होटल के मालिक यह भी कह देते कि तुम तो बच्चे हो तुम क्या बिजनेस करोगे, कुछ होटल के मालिक उन्हें वहां से भगा देते लेकिन रितेश ने फिर भी हार नहीं मानी और कोशिश करते रहे । शुरुआत में जब oyo की शुरुआत रितेश अग्रवाल ने की थी तब oyo कोई फेमस ब्रांड नहीं था तब oyo को कोई नही जानता था तो यह सोचने वाली बात है की oyo में लोग रूम भला क्यों बुक करते तो इसके लिए रितेश अग्रवाल ने अलग-अलग मार्केटिंग स्ट्रेटजी अपनी जैसे जैसे कि वह जिस होटल में अपना ब्रांड नाम देते थे वहां पर एक बड़ा सा पोस्टर सस्ते दामों में बनाकर खुद से लगाते थे जिसमें oyo ब्रांड के होटल में कैसा सर्विस है वह लिखा हुआ रहता था, उसे बैनर में सिर्फ कस्टमर के फायदे लिखे रहते थे की कैसे कम पैसे में ओयो रूम अच्छी फैसिलिटी प्रदान करती है जिससे जब लोग उसे पढ़ते थे तब लोग Oyo ब्रांड में रूम बुक करने के बारे में सोचते थे, रितेश अग्रवाल ने ओयो रूम के अंदर अपने ब्रांड का अलग-अलग चीज रखी जैसे कि कार्ड वगैरह, स्टार्टिंग में यो ने प्रॉफिट पर कम ध्यान दिया और कस्टमर को ज्यादा फायदे देने की कोशिश की और उनसे रिव्यू ली इससे फायदा यह हुआ कि कस्टमर ने जब एक बार Oyo रूम बुक किया तो उन्होंने दोबारा भी बुक करने का सोचा क्योंकि उनको वहां पर अच्छी फैसिलिटी मिली । OYO ने वादा किया की एक स्टैंडर्ड रूम – साफ बिस्तर, अच्छा वॉशरूम, AC और Wi-Fi – वो भी कम दाम में । और इसी तरह से रितेश अग्रवाल कोशिश करते गए ।
रितेश अग्रवाल ने oyo को expand करने और एक बड़ा ब्रांड बनाने के लिए कब-कब कितना फंडिंग लिया ।
1. रितेश अग्रवाल को सबसे पहले फंडिंग paypal के को-फाउंडर पीटर थियल से Thiel felloship मिला । Thiel felloship एक फेलोशिप प्रोग्राम है जिसमें PayPal के को- फाउंडर पिटर thiel उन entrepreneur को फंडिंग देती है । जिनका उम्र 21 साल से नीचे हो और जिनका बिजनेस एक प्रॉब्लम सॉल्विंग बिजनेस है जिससे एक्चुअल में दुनिया या फिर किसी देश में कुछ खास बदलाव हो सके Thiel फैलोशिप लेने के लिए कॉलेज ड्रॉपआउट करना होता है अगर आप अपना कॉलेज नहीं छोड़ोग तो आपको Thiel felloship नहीं मिल सकता है रितेश अग्रवाल ने Thiel felloship लेने के लिए अपनी कॉलेज छोड़ी थी और अपने स्टार्टअप पर पूरे ध्यान पूर्वक से काम किया था Thiel फैलोशिप में करीब $100000 पीटर थियल के द्वारा दी जाती है रितेश अग्रवाल को जब $100000 मिला था तब उन्होंने Oyo की सही से ब्रांडिंग की और अपने बिजनेस को एक्सपेंड किया ।
2. वर्ष:- ( 2014 ) series A funding
Investors :- (Lead Investor) Lightspeed Venture Partners
Amount :- ( लगभग 6 लाख डॉलर )
3. वर्ष:- ( 2015 ) series' B funding
Investors:- ( Sequoia Capital (फिर से) Lightspeed Venture Partners, Greenoaks Capital
Amount:- 25 million dollar लगभग 160 करोड़ रूपए।
4. वर्ष :- ( 2016 ) series C funding
Investors :- SoftBank Group (Japan) (मुख्य निवेशक) साथ में पुराने निवेशक Sequoia Capital, Lightspeed Venture Partners, Greenoaks Capital ने भी हिस्सा लिया ।
Amount :- 62 million dollar यानी की लगभग 400 करोड़ के आसपास
5. वर्ष:- ( 2017 ) series D funding
Investor :- soft bank,Hero entreprise और पिछले कुछ निवेशक :- Sequoia Capital, Lightspeed Venture Partners, Greenoaks Capital
Amount :- लगभग 250 मिलियन डॉलर
6. वर्ष :- ( 2018 ) series E funding
Investors:- वही सारे पुराने निवेशक:- SoftBank Vision Fund, Lightspeed Venture Partners, Sequoia Capital, Greenoaks Capital, . Hero Enterprise, China Lodging Group (Huazhu Hotels Group)
Amount:- लगभग 1 billion dollar
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