Phil knight: कैसे एक fail एथलीट ने खड़ा किया अरबों का सम्राज्य
Phil Knight, Nike के को-फाउंडर हैं और उनकी ज़िंदगी को पूरे दुनियां में एक आइकन की तरह देखा जाते है एक ऐसे इंसान जिन्होंने अपने मेहनत से सपनों को सच किया लेकिन उसके जीवन मै कई विफलताओं, संघर्षों और रिस्क आए इन सभी का सामना किया आज के इस आर्टिकल में उसके जर्नी को गहराई से जानेंगे।
सपने की शुरुआत
Phil Knight का जन्म 1938 में अमेरिका के Portland नाम के एक स्मॉल टाउन हुआ था बचपन से ही वो काफ़ी तेज़ दौड़ते थे उसकी लाइफ अल्टीमेट एक ही ड्रिम था कि उसे एक ग्रेट एथलीट बनना है स्कूल और कॉलेज अपनी रनिंग पे बहुत काम किया वे लगातार praticce करते थे और कई रेसेस जीते रनिंग के साथ साथ फिल ने अपनी एजुकेशन को भी कंटिन्यू रखा और उन्होंने 1962 में MBA कंप्लीट कर लिया वो अभी भी रनिंग कंटिन्यू रखना चाहता था लेकिन एक सुबह अपनी प्रैक्टिस रन के दौरान उनका रियलिटी से सामना हुआ अपना पूरा यूथ रनिंग मै सर्मपित करने के बाद वे स्टेट के तो बेस्ट एथलीट बना चुके थे लेकिन वे नेशनल और इंटरनेशनल लेवल तक नहीं बना पाए थे वे 24 साल के हो चुके थे और अब एथलीट और बैटर होने का कोई स्कोप नहीं बचा था ये जानने के बाद वे पूरा उदास हो गए दुखी मन से फिल ने ये एक्सेप्ट कर लिया कि यह उसके एथलेटिक कैरियर का एंड है उसको अब एथलीट बनाने का सपना टूट गया लेकिन वे कुछ ऐसा करना चाहते थे जिससे वे स्पोर्ट्स के क़रीब रहे सके फिल हर स्पोर्ट्स रनर कि तरफ अपने रनिंग शूज से डिप्ली कॉन्टेक्टेड था इसलिए उन्होंने डिसाइट किया कि वे शूज़ का बिज़नस शुरुआत करेंगे यहीं से उसका सपना का शुरुआत हुआ एक ऐसी कंपनी बनाना जो दुनियां के सबसे बड़े स्पोर्ट्स ब्रांड्स मै से एक हो ।
पहला क़दम
Phil knight ने जापान जाकर Onitsuka Tiger (आज की ASICS) कंपनी से पार्टनरशिप किया और उसके जूते अमेरिका में लाकर बेचने लगे और Blue Ribbon Sports के नाम रखा उसके पास ज्यादा पूंजी नहीं होने के कारण उसने ख़ुद का शॉप नहीं खुला पाया जिससे वे अपने कार के डिक्की से जूते बेचते थे जहां पर स्पोर्ट्स खेल होता था वहां वहां जाकर ख़ुद ऑर्डर देकर जूते बेचते थे लेकिन असली झटका तब लगा, जब Onitsuka ने Phil से उनकी डील तोड़ दी और किसी और को डिस्ट्रिब्यूटर बना दिया और phil को बाहर निकाला दिया ।
Nike की शुरुआत
Phil को डिस्ट्रिब्यूटर शिप से बाहर निकला देता है यह phil बहुत बड़ा फैलियर था क्योंकि इसके बाद कोई अपना प्रॉडक्ट नहीं था जो मार्केट में बेचा सकता था और इसके बाद इन्होने दृढ़ निस्चय किया और सोचा कि कितनी बड़ी असफलता क्यों न आ जाए रुकना नहीं है और 1971 मै अपने कोच Bill Bowerman के साथ मिलाकर Nike कि शुरुआत किया
कैसे उन्होंने faillure से लड़ा
कंपनी शुरूआत करने के बाद इन्होंने अपने सेविंग से कंपनी चलाया लेकिन जब सेविंग ख़त्म हो गया तो phil को काफ़ी ज्यादा उधार लेना पड़ा बार बार loan लेने पर कई बार बैंक ने पैसे देने से मना कर दिया और 1980s में Nike के कुछ शूज़ क्वालिटी में प्रॉब्लम आने के कारण फस गई जिससे उन्हें बहुत बड़ा नुकसान हुआ इसके बाद ये 1990s एक Controversy मै फंसे Nike पर इल्ज़ाम लगे कि वो बच्चों और ग़रीब देशों में मज़दूरों से ख़राब कॉन्टीशन में काम करवा रहे है और कम मज़दूरी पर काम कर रहे है जिससे पूरे दुनियां भर में विरोध होने लगा जिससे Nike का ब्रांड वैल्यू घटने लगे इसके बाद उन्हें नई पॉलिसी बनानी पड़ी, Ethical practices को अपनाना पड़ा Nike ने एक स्मार्ट फिटनेस बैंड लॉन्च किया जिसका नाम था FuelBand यह स्टेप्स, कैलोरी और मूवमेंट ट्रैक करता था लेकिन ये पूरे तरह से फैल हो गया क्योंकि इसका ट्रैकिंग सिस्टम सटीक नहीं था ऐप और डिवाइस में सिंक्रोनाइजेशन की दिक्कत थी Fitbit और Apple Watch ने मार्केट में इसे पीछे छोड़ दिया जिसके बाद Nike ने 2014 मै इस डिवाइस को बंद कर दिया और Tech दुनियां से बाहर हो गए जिससे काफ़ी ज्यादा नुकसान हुआ अब Phil knight को समझा में समझा आया कि अगर सफ़ल होना है तो परेशानियां आना ज़रूरी है असफलता तेज़ी से ग्रोथ से ग्रोथ होता है कमजोरियों का पता चलता है कमजोरियों को पता चलने पर प्रॉडक्ट का गुणवत्ता बढ़ा जाता है जिससे ग्राहक पहले से ज्यादा पसंद आता है और इसी Phil knight faillure से सीखते गया और आगे बढ़ते गया।
