Tariff क्या होता हैं जाने tariff के फायदे और नुकसान।
टैरिफ क्या होता है? (What is Tariff)
टैरिफ एक तरह का टैक्स होता है जो सरकार विदेश से आने वाले समान पर लगती है जब कोई कंपनी या व्यक्ति किसी देश से समान मंगवाता हैं तो उस पर एक ख़ास टैक्स लिया जाता है इसी को टैरिफ कहते है जैसे अगर भारत अमेरिका से मशीनें मंगवाता है और सरकार उस पर 25% लगती है तो वो मशीनें 25% महंगी हो जाएंगी।
टैरिफ क्यों लगाया जाता है? (Why is Tariff Imposed?)
टैरिफ यानी टैक्स को सरकार कई वजहों से लगाती है। ये सिर्फ एक पैसा वसूलने का तरीका नहीं है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाता है। नीचे इसके मुख्य कारण दिए गए हैं:
- घरेलू उद्योग को सुरक्षा देने के लिए
जब कोई विदेशी कंपनी अपना सामना सस्ते दाम मै किसी दूसरे देश मै बेचते है तो उससे उस देश के कंपनी को काफ़ी नुकसान होता है क्योंकि उस दाम वे सामना नहीं बना पाते है इसलिए सरकार टैरिफ लगाती है ताकि विदेशी सामना महंगी हो जाए और लोग देशी उत्पाद खरीदें। इससे देश कारोबार बढ़ता है और देश आत्मनिर्भरता बनता है।
- सरकार की आमदनी बढ़ाने के लिए
जब भी कोई सामना विदेश से आता है तो उस पर टैरिफ लगता है तो सरकार को उससे टैक्स के रूप में पैसा मिलता है सरकार टैरिफ के ज़रिए पैसा कामता है इस कमाई को सरकार कई जगह खर्चे करते है जैसे सड़कें बनाना, स्कूल एवं हॉस्पिटल निर्माण करना, पब्लिक सर्विसेज इत्यादि पर खर्च कर सकती है।
- विदेशी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए
हर देश चाहता है कि उसकी कंपनियाँ मजबूत बनें। हर देश अपने देशी कंपनी को मज़बूत करना चाहते हैं सरकार टैरिफ लगाकर विदेशी कंपनिया को सीधा मुकाबला नहीं करने देते है जिससे कॉम्पिटिशन कम हो जाता है और देशी कंपनियों को अपनी पकड़ मजबूत करने में समय मिलता है इसलिए सरकार टैरिफ लगाकर देशी कंपनियों को आगे बढ़ाने का मौका देते हैं जिससे कंपनी आगे बढ़ सकें।- देश की सुरक्षा और नीति को बनाए रखने के लिए
कभी-कभी सरकार टैरिफ का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से भी करती है जैसे अगर किसी देश से संबंध खराब हो जाएँ, तो उस देश के प्रोडक्ट पर भारी टैरिफ लगा दिया जाता है।
- रोज़गार के अवसर बढ़ाने के लिए
जब देशी कंपनियाँ तरक्की करती हैं, तो उन्हें ज़्यादा कर्मचारियों की जरूरत होती है।
इससे देश में नौकरी के अवसर बढ़ते हैं, जो बेरोज़गारी को कम करने में मदद करता है।
टैरिफ के फायदे (Benefits of Tariff)
- देशी कंपनियों को बढ़ावा (Boost to Domestic Industries)
जब सरकार विदेश से आने वाले सामना पर टैरिफ लगा देता है तो वे सामना पहले से महंगे मिलने लगते है जब विदेश से आने वाले सामना महंगे हो जाते है तो लोग सोचते है कि क्यों देशी सामना लिया जाए जो सस्ती है और लोग देशी चीजें लेने लगते है ।
इससे क्या होता है?
देश की फैक्ट्रियाँ और कंपनियाँ तरक्की करती हैं
उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ती है
देश की इंडस्ट्री ग्रोथ करने लगती है
छोटे और मिडियम बिज़नेस को मजबूती मिलती है
उदाहरण:
अगर चाइना से आने वाला खिलौना महंगा हो जाए, तो लोग भारत में बने खिलौने खरीदेंगे। इससे देश के खिलौना उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- रोज़गार बढ़ता है (Employment Generation)
जब देशी कंपनियों की बिक्री बढ़ती है, तो उन्हें उत्पादन (Production) बढ़ाना पड़ता है।
टैरिफ लगने से देशी कंपनी को तेज़ी से ग्रोथ मिलता है जिससे कंपनी की बिक्री बढ़ाने लगते है कंपनी को ओर विकाश के लिए पहले से ज्यादा वर्कर्स कि जरूरत पड़ती है जिससे नए रोज़गार उत्पन्न होते है जिससे नए फेक्ट्री खुलने लगते हैं युवाओं को नौकरी के अवसर मिलते हैं जिससे बेरोज़गारी कम होने लगते है और धीरे धीरे ग्रामीण इलाकों में भी इंडस्ट्री पहुँचती है
- सरकार को टैक्स के रूप में कमाई (Revenue for the Government)
हर बार जब कोई विदेशी सामान टैरिफ देकर भारत में आता है, सरकार को उससे सीधा पैसा मिलता है टैरिफ से सिर्फ देशी कंपनियों को फायदा नहीं मिलता बल्कि सरकार का भी फायदा होता है।
इस पैसे का क्या करती है सरकार?
नए स्कूल और कॉलेज बनाती है
सड़क, बिजली, पानी जैसी ज़रूरी चीजों में निवेश करती है
गरीबों के लिए योजनाएँ चलाती है
- आत्मनिर्भरता को बढ़ावा (Promotion of Self-Reliance)
जब कोई देश अपने देश कि जरूरत का सामना ख़ुद बनाने लगते है तो वे देश धीरे धीरे आत्मनिर्भर बनने लगते है टैरिफ लगाने से विदेशी सामना महंगा हो जाता है जिससे देश को मजबूरी में नहीं, समझदारी में खुद पर भरोसा करना आता है और अपने ज़रूरत का सामना ख़ुद बनाने लगते हैं
इसका क्या असर होता है?
नई टेक्नोलॉजी डेवलप होती है
देश इनोवेशन की तरफ बढ़ता है
Make in India, Start-up India जैसी योजनाएँ सफल होती हैं
देश ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाता है
उदाहरण:
मोबाइल कंपनियाँ पहले चीन पर निर्भर थीं, लेकिन अब भारत में ही मोबाइल असेंबल होने लगे हैं। ये आत्मनिर्भरता का ही परिणाम है।
मोबाइल के लिए भारत पहले चीन पर निर्भर थी लेकिन अब भारत में ही मोबाइल असेंबल होने लगे हैं। ये आत्मनिर्भरता का ही परिणाम है।
टैरिफ के नुकसान (Disadvantages of Tariff)
- चीजें महंगी हो जाती हैं (Higher Prices for Consumers)
जब सरकार विदेशी सामान पर टैरिफ लगाती है, तो वो सामान महंगा हो जाता है।
जब सरकार विदेश से आने वाले सामना पर टैरिफ लगते है तो वो सामना महंगा मिलने लगते है दाम बढ़ाने से इसका सीधा असर ग्राहक पर पड़ता है मतलब अब बढ़े हुऐ दाम दुकानदार सीधे ग्राहक से वसूलेगा जो समान पहले 1500 रुपया मै मिलता था उसे अब 1800 रुपया में मिलेगा इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है गरीब और मिडिल क्लास को सबसे ज़्यादा परेशानी होती है जायद खर्चे बढ़ाने से सेविंग कम हो जाती है।
अगर लैपटॉप पर टैरिफ बढ़ा दिया जाए, तो स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स को ज़्यादा पैसा देना पड़ेगा जिससे शिक्षा और डिजिटल इंडिया की स्पीड धीमी हो सकती है।
- चुनाव की कमी (Limited Consumer Choices)
जब विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट्स महंगे हो जाते हैं, तो आम आदमी उन्हें खरीद नहीं पाता।
जब विदेश से आने वाले प्रोडक्ट्स पहले से ओर ज्यादा महंगे हो जाते है तो उस कीमत में आम आदमी उसे खरीद नहीं पाते है
अब उनके पास चुनने के लिया ज्यादा विकल्प नहीं बचते है और जो विकल्प होते है वे ज़रूरी नहीं कि उसकी ज़रूरत को पूरा कर पाएं इससे लोगों को कंप्रोमाइज़ करना पड़ता है जिससे मनचाही ब्रांड या डिजाइन नहीं मिलते है जिससे उसको बढ़िया प्रॉडक्ट नहीं मिला पता है ग्राहक को मजबूरी में वही खरीदना पड़ता है जो उपलब्ध है।
- गुणवत्ता में गिरावट (Decline in Quality)
जब देशी कंपनियों को विदेशी कंपनियों से मुकाबला नहीं करना पड़ता, तो देशी कंपनी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देता है क्योंकि कंपनी को लगता है ग्राहक को तो हमारा ही प्रोडक्ट खरीदना है, फिर क्वालिटी में मेहनत क्यों करें इससे प्रोडक्ट्स की क्वालिटी गिरने लगते हैं सर्विस खराब देने लगते हैं ग्राहक को वैल्यू फॉर मनी नहीं मिलने लगते हैं
कॉम्पिटिशन ही इनोवेशन और क्वालिटी का असली ईंधन होता है। जब वो नहीं रहेगा, तो बाजार कमजोर हो जाएगा।
- ट्रेड वॉर का खतरा (Risk of Trade War)
अगर भारत किसी दूसरे देश पर टैरिफ लगाता है तो वह देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है अगर भारत के प्रॉडक्ट पर टैरिफ लगा देगा तो भारत के एक्सपोर्ट भरी नुकसान हो सकता है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा सकता है जिससे बिज़नस में नुकसान होने लगते है और विदेशी निवेश (Foreign Investment) कम हो सकता है जिससे धीरे धीरे ग्लोबल रिलेशनशिप ख़राब होने लगते है अगर भारत चीन पर टैरिफ लगता है तो चीन भी भारत पर टैरिफ लगा सकता है जिससे दोनों देशों का नुकसान हो सकता है
